Saturday, December 6, 2008

मुंबई में आतंक

कोई घर में घुस के मेरे
माँ का आँचल खींच गया
और हम चौकीदारों से
इस्तीफा लेते रह गए|

रगों में खून ही है अभी
या पिघलकर पानी हो गया ?
की कोई पीटता रहा हमें
और हम वार्ता करते रह गए|

जो सीना ठोकते थे लगाकर आग
वो छिप बैठे बिलों में भागकर अपने
लगी जब आग भारत में
बिहारी - मराठी देखते रह गए|

खुदा का शुक्र है की मर्द थे कुछ
जो कूद पड़े उस आग में;
जो तुम बुड्ढों पे बात आई
तो तुम बयान देते रह गए |

Composed on 29th November 2008

2 comments:

Abhinav Biyani said...

excellent cmt...:)..

Ankur Sinha said...

Good one man...

well said!!!